Sunday, January 4, 2009

भारत में प्रजातंत्र

प्रजातंत्र फल फूल रहा है हमारे देश में .बहुत सीमा तक वह सफल भी है .कभी कभी लगता है कि अशिक्षा की वजह से भी लोकतंत्र का सफल कार्यान्वयन हमारे देश में नहीं हो पा रहा है . दुःख होता है जब निरक्षर इस देश में मंत्री या मुख्य मंत्री बन जाता है .तब शासन ,प्रशासन वह कैसे चलाएगा ,यह एक प्रश्न बन जाता है .जाहिर है कि सत्ता सञ्चालन का सूत्रधार कोई और बन जाता है .मंत्री ,मुख्यमंत्री मात्र उसकी कठपुतली रहते हैं .कैसा मजाक है कि एक चपरासी के पद के लिए भी शिक्षित होना अनिवार्य है लेकिन देश या प्रदेश की बागडोर सँभालने वाले के लिए शिक्षा की अनिवार्यता नहीं .उम्र की कोई सीमा नहीं .उसके कार्य पर जनता के लिएकोई जवाबदेही नहीं .उसे वापस लाने का जनता को कोई अधिकार नहीं .वह जनता का सेवक नहीं बल्कि मानो शासक हो जाता है ।
क्या यह स्थिति बदलेगी ? विधायक या सांसद के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता निर्धारित होगी .उम्र सीमा तय होगी .जाति धर्मं क्षेत्र से परे भारतीय राजनीति होगी .प्रश्न भविष्य के गर्भ में हैं .काश ,ऐसा हो ताकि भारत का प्रजातंत्र अन्य लोकतान्त्रिक देशों जैसा हो सके .पढ़े लिखे योग्य व्यक्ति शासन संभालें तभी देश का हित होगा ।

3 comments:

दिगम्बर नासवा said...

मैं आपकी बात से १००% सहमत हूँ

Smita Asthana said...

i am also 100% agree with you.education has to be must for polititian too.but this is realy very sad in india this is not compulsury. We have to take some strict action against this isuu.

आशीष said...

आपने हमारे जैसे युवकों के सामने एक यक्ष प्रoA उछाल दिया है कि क्या स्थिति बदलेगी?

आशीष महर्षि, दैनिक भास्कर